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| भारतीय प्रधानमंत्री मोदी जी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प। |
News Subah Ki: दुनिया के सुपर पावर कहे जाने वाला अमेरिका आज बहुत बड़ा असमंजस और उहापोह में है। क्योंकि वह पुराने भारत, जिसे वह कई दशकों से आँखों के इशारे पर चलाते रहता था। अब वहीं नया भारत उसकी आँखों में आँखें डालकर खड़ा है। यह कोई साधारण बदलाव नहीं बल्कि उभरते हुए विकसित भारत की धमक है। क्योंकि यह इतिहास में पहली बार है, जब भारत ने दुनिया के सबसे बड़ी ताक़त कहे जाने वाले सुपर पावर अमेरिका से कहा है। हम सबकी सुनेंगे, पर मानेंगे नहीं क्योंकि हमारे लिए हमारा देशहित सर्वोपरि है। और यहीं से शुरू होती है, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेचैनी? व्हाइट हाउस की झुंझलाहट, और पश्चिमी देशों के सोच की हार?
Highlights
✅ अमेरिका असमंजस में क्योंकि पुराने भारत, जिसे वह कई दशकों से आँखों के इशारे पर चलाता था, अब आँखों में आँखें डालकर खड़ा है।
✅ यह कोई साधारण बदलाव नहीं बल्कि इतिहास में पहली बार है? जिसे दुनिया महसूस कर रही है, उभरते हुए विकसित भारत की धमक!
✅ यह हैं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेचैनी? व्हाइट हाउस की झुंझलाहट, और पश्चिमी देशों के सोच की हार?
✅ भारत अब आधुनिक हथियारों की ख़रीद किसी देश के आदेश पर नहीं, बल्कि अपनी ज़रूरत के हिसाब से और रणनीतिक निर्णय पर करता है।
✅ आज के दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था चुपचाप नहीं, बल्कि सारी दुनिया को चौंकाते हुए सबसे तेज़ रफ्तार से आगे बढ़ रही है।
अब देखिए नए भारत की देशहित सर्वोपरि वाले फैसले:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लागू कर डर दिखाया गया, फिर भी भारत ने अपने नागरिकों के लिए सस्ता तेल चुना, क्योंकि यहाँ के मोदी सरकार अपने देश की लोगों के सामने जवाबदेह है, किसी साम्राज्य या देश के सामने नहीं।
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| भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे तेज़ रफ्तार, पीएम मोदी के साथ। |
दुनिया को चौंकाते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे तेज़ रफ्तार:
आज के दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था चुपचाप नहीं बढ़ रही है, बल्कि सारी दुनिया को चौंकाते हुए सबसे तेज़ रफ्तार से आगे बढ़ रही है। अब नया भारत पहले वाला वो देश नहीं जिसे कभी “उभरता हुआ” कहा जाता था, आज यह “निर्णायक शक्ति” बन चुका है। अमेरिका चाहता है कि भारत अपने खेत, अपना दूध, अपनी मेहनत, सब विदेशी बाज़ारों के हवाले कर दे। लेकिन भारत साफ़ कहता है कि हमारे किसान बिकेगा नहीं। और न ही अमेरिकी दूध भारतीय बाजारों में बिकेगा? इसलिए सौदा नहीं बनेगा।
भारत का “मेक इन इंडिया” सिर्फ़ एक नारा नहीं रहा, यह अब वैश्विक निर्भरता तोड़ने का हथियार बन चुका है। अब धीरे-धीरे सारे दुनिया को समझ आ रहा है, कि भारत अब आयातक देश नहीं, बल्कि निर्माता देश बन रहा है। और सबसे चुभने वाली बात यह है कि भारत का प्रधानमंत्री अब किसी देश के बुलावे पर दौड़ने वाला नेता नहीं है। व्हाइट हाउस का न्योता अगर सम्मान के साथ नहीं आता, तो उसे ठुकराने का साहस अब भारत रखता है। ट्रेड डील अटकी पड़ी है, क्योंकि यहाँ कोई फोन करके मनाने नहीं बैठा।
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भारत का सौदा किसी देश के दबाव में नहीं बल्कि बराबरी पर:
यह नया भारत है, यहाँ कोई सौदा किसी देश के दबाव पर नहीं, बल्कि अपने नागरिकों के हित देख कर बराबरी पर होते हैं। आज का भारत ना अमेरिका के इशारे पर चलता है, ना यूरोप के दबाव में झुकता है। यह अपने निर्णय अपने नागरिकों की भलाई देखकर लेता है।
यही वजह है कि अमेरिका हक्का-बक्का है। उसने कभी कल्पना ही नहीं की थी कि भारत ऐसा भी हो सकता है। यह वही भारत नहीं है जिसे संभालना आसान था। यह नया भारत है, यह मोदी का भारत है, और दुनिया अब समझ नहीं पा रही कि इसे कंट्रोल कैसे किया जाए।
Disclaimer: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। News Subah Ki ने पोस्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है, और न ही उनकी सटीकता की गारंटी देता है। व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं, और आवश्यक रूप से News Subah Ki के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। पाठक विवेक का प्रयोग करें।


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