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पूरे विश्व में गूंजा, भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का डंका! जिसे देख पूरी दुनिया हुई कायल।

भारत के यशस्वी और सबके चहेते प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी।
भारत के यशस्वी और सबके चहेते प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी।

 News Subah Ki: ये हैं, हमारे देश भारत के प्रधान सेवक श्री नरेंद्र मोदी जी की प्रधानी का कमाल जिसे देख कर पूरी दुनिया आश्चर्य चकित रह गई है। और सारे भारतीयों का सीना गर्व से 56 इंच चौड़ा हो गया है। पाकिस्तान तो सिर्फ़ एक परदा है, असल कहानी उस मंच की है, जहाँ पूरी दुनिया के ताक़तवर किरदार खड़े होते हैं। और जिस मंच का सूत्रधार कोई और नहीं बल्कि नया भारत का अपना लोकप्रिय और सबके चहेते यशस्वी प्रधान सेवक श्री नरेंद्र मोदी जी है। 

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के पिछले ग्यारह सालों के शासन काल में भारत ने कभी शोर नहीं मचाया, पर चाल ऐसी चली कि वॉशिंगटन से लेकर बीजिंग तक और ब्रुसेल्स से लेकर खाड़ी देशों तक सारे समीकरण बदलते चले गए। यह कोई टकराव की राजनीति नहीं थी, बल्कि यह तो ताक़त को बिना गोली चलाए झुकाने की कला थी।आइए इस बात को पूरे विस्तार से समझते हैं.......।

 Highlights  

भारतीय के प्रधानमंत्री मोदी जी का कमाल जिसे देख कर पूरी दुनिया आश्चर्य चकित रह गई है। और सारे भारतीयों का सीना गर्व से 56 इंच चौड़ा हो गया।

पिछले ग्यारह सालों में भारत ने कभी शोर नहीं मचाया, पर चाल ऐसी चली कि वॉशिंगटन से बीजिंग तक और ब्रुसेल्स से खाड़ी तक समीकरण बदलते चले गए।

फार्मा लॉबी को लगा कि महामारी उनके लिए सुनहरा बाज़ार बनेगी तब भारत ने मुनाफ़े की भाषा नहीं बोली, बल्कि मानवता की भाषा बोली।

इतने सालों में पहली बार भारत ने दुनिया को याद दिला दिया कि देश का नेतृत्व का मतलब व्यापार नहीं, कर्तव्य होता है।   

पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (OPEC) को पहली बार समझ आया कि अब भारत ग्राहक नहीं, निर्णायक है।

भारत के यशस्वी और सबके चहेते प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी।
भारत के यशस्वी और सबके चहेते प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी।


ऐसे हैं हमारे मोदी जी जो बोलने में नहीं करने में महारत हासिल किए:

कोविड के समय जब फार्मा (Pharma) लॉबी को लगा कि महामारी उनके लिए सुनहरा बाज़ार बनेगी तब भारत ने मुनाफ़े की भाषा नहीं बोली, बल्कि मानवता की भाषा बोली। मुफ़्त वैक्सीन, खुले हाथ और दुनिया को याद दिला दिया कि नेतृत्व का मतलब व्यापार नहीं, कर्तव्य होता है।   

जब पेट्रोलियम कार्टेल दाम तय करने का गुरूर पाले बैठा था तब भारत ने रूस से हाथ मिलाया। सस्ता तेल, मज़बूत अर्थव्यवस्था और वो झटका जिससे पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (OPEC) को पहली बार समझ आया कि अब भारत ग्राहक नहीं, निर्णायक है।

हथियारों के बाज़ार में जहाँ दशकों से पश्चिमी ठेकेदार राज करते थे तो वहाँ सिर्फ़ कुछ घंटों की सैन्य कार्रवाई ने साफ़ संदेश दे दिया कि अब भारत सिर्फ़ खरीदार नहीं, निर्माता है। अब “Made in India” सिर्फ़ टैग नहीं, एक चेतावनी है।

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भारत के यशस्वी और सबके चहेते प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी।
भारत के यशस्वी और सबके चहेते प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी।


भारतीय प्रधानमंत्री मोदी जी का विज़न कभी धुंधला नहीं साफ था:

भारतीय प्रधानमंत्री मोदी जी का विज़न कभी धुंधला नहीं था। भारत को मोहरा नहीं, मास्टरमाइंड बनाना, न झुकना, न डराना, सिर्फ़ अपने देशहित पर अडिग रहना। आज भारत के वैज्ञानिक, innovators और रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) संस्थान आत्मनिर्भरता को भाषण नहीं, हक़ीक़त बना चुके हैं।

खिलौने से लेकर टैंक तक, दवाओं से लेकर ड्रोन तक भारत अब बाज़ार नहीं बल्कि ब्रांड बन चुका है। तेल की कीमतें तय करने में अब खाड़ी देश अकेले नहीं बल्कि भारत भी है।

आज की तारीख में भारत की “ना” का मतलब पूरे समीकरण पर भारी है। दवाओं की दुनिया (Pharma Sector) में भारत सिर्फ़ सप्लायर नहीं अब रीढ़ बन चुका है।

हथियारों की गूंज अब सिर्फ़ सीमा पर नहीं, उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के बोर्डरूम तक सुनाई देती है। तुर्कीये के ड्रोन बिज़नेस में खामोशी छा गई है। चीन अंदर ही अंदर उबल रहा है, पर बोलने से पहले दस बार सोच रहा है।

कुछ बुद्धिजीवी लोगों का इतिहास की समझ का अभाव:

यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका (USA) जो कभी शर्तें थोपता था? या उसकी बात करता था, आज वही दिल्ली के दरवाज़े पर शांति की भाषा बोल रहा हैं। फिर भी इस देश में कुछ बुद्धिजीवी लोग हैं, जो इस नेतृत्व को “कमज़ोर”, “डरपोक” कहने का मूर्खतापूर्ण और कायरतापूर्ण दुस्साहस करते हैं। वास्तव में यह मतभेद नहीं, यह उन बुद्धिजीवी लोगों के इतिहास की समझ का अभाव है। सोचो, जिस नेता ने बिना युद्ध छेड़े वैश्विक ताक़तों की दिशा मोड़ दी वो कोई साधारण राजनेता नहीं होता, वो रणनीतिक योद्धा होता है। और याद रखिए कि यह एक कहानी का अंत नहीं… बल्कि यह तो बस भूमिका थी। असली अध्याय अभी लिखा जाना बाकी है।


Disclaimer: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। News Subah Ki ने पोस्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है, और न ही उनकी सटीकता की गारंटी देता है। व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं, और आवश्यक रूप से News Subah Ki के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। पाठक विवेक का प्रयोग करें।

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