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इतिहास के कुछ अनसुने रहस्य! श्रीमती इंदिरा गाँधी खालिस्तान के कारण मरी या करपात्री जी महाराज के श्राप के कारण?


श्रीमती इंदिरा गाँधी जी करपात्री जी महाराज से प्रधानमंत्री बनने का आशीर्वाद प्राप्त करते हुए।
श्रीमती इंदिरा गाँधी जी करपात्री जी महाराज से प्रधानमंत्री बनने का आशीर्वाद प्राप्त करते हुए।


News Subah Ki: इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि एक बार श्रीमती इंदिरा गाँधी जी, करपात्री जी महाराज के पास प्रधानमंत्री बनने का आशीर्वाद लेने गई थी, क्योंकि उस समय कहा जाता था कि करपात्री जी महाराज का आशीर्वाद कभी निष्फल नहीं जाता था। 

तब करपात्री जी महाराज ने श्रीमती इंदिरा गाँधी जी को इस शर्त पर आशीर्वाद दिया था कि प्रधानमंत्री बनते ही सबसे पहले संसद से गौ हत्या के विरुद्ध कानून बना कर देश में गौ हत्या बंद करनी होगी। 

कहा जाता हैं कि श्रीमती इंदिरा गाँधी जी ने करपात्री जी महाराज से यह वादा किया था कि प्रधानमंत्री बनने पर सबसे पहला काम संसद में गौ हत्या के विरुद्ध कानून बना कर ही करूंगी।

 Highlights  

श्रीमती इंदिरा गाँधी, करपात्री जी महाराज के पास प्रधानमंत्री बनने का आशीर्वाद लेने गई थी, इस बात का इतिहास गवाह है।

गौ हत्या के विरुद्ध संसद में कानून बना कर देश में गौ हत्या बंद करनी होगी, इस शर्त पर ही करपात्री जी महाराज ने आशीर्वाद दिया था।

करपात्री जी महाराज के ऐसे कई बार मिलने और वादा याद दिलाने के बाद भी जब इंदिरा गांधी जी ने नहीं सुनी बात?

चश्मदीदों के अनुसार उस दिन संसद भवन के पास कम से कम 10 लाख लोगों की भीड़ जुटी हुई थी।

करपात्री जी महाराज ने मारी हुई गायों के गले से लिपट कर रोते हुए कहा था कि मैं श्राप देता हूँ कि एक दिन तेरी देह भी इसी प्रकार गोलियों से छलनी होगी।

करपात्री जी महाराज और संत समाज प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी जी से मिलते हुए।
करपात्री जी महाराज और संत समाज प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी जी से मिलते हुए।


करपात्री जी महाराज के आशीर्वाद से जब इंदिरा गाँधी प्रधानमंत्री बनी:

प्रधानमंत्री बनने के करीब दो महीने बाद करपात्री जी महाराज श्रीमती इंदिरा गाँधी जी से मिले और उनका वादा याद दिला कर गौ हत्या के विरुद्ध कानून बनाने के लिए कहा तो प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा जी ने कहा कि महाराज जी अभी तो मैं नई-नई हूँ, कुछ समय दीजिए, मैं जरूर ये काम करूंगी। 

कुछ दिन गुजरने के बाद करपात्री जी महाराज फिर गए प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी जी मिलने और उनसे मिलकर गौ हत्या के विरुद्ध कानून बनाने की मांग की लेकिन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी जी ने फिर इस बात को टाल दिया। 

करपात्री जी महाराज के ऐसे कई बार मिलने और वादा याद दिलाने के बाद भी जब प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी जी ने गौ हत्या के विरुद्ध संसद से कानून नहीं बनाया और नहीं गौ हत्या बंद कराने के विरुद्ध कुछ काम किया।

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करपात्री जी महाराज द्वारा श्रीमती इंदिरा गाँधी जी को दिया गया श्राप।
करपात्री जी महाराज द्वारा श्रीमती इंदिरा गाँधी जी को दिया गया श्राप फलीभूत होते हुए।


करपात्री जी महाराज के नेतृत्व में संत समाज का विशालकाय जुलूस: 

करपात्री जी महाराज के कई बार मिलने और वादा याद दिलाने के बाद भी जब इंदिरा जी ने कुछ नहीं किया तो देश के संत समाज, शंकराचार्य, अपने छत्र आदि छोड़ कर पैदल ही, आम जनता के साथ, गायों को आगे आगे करके संसद कूच किया, करपात्री जी महाराज के नेतृत्व में जगन्नाथपुरी, ज्योतिष पीठ व द्वारका पीठ के शंकराचार्य, वल्लभ संप्रदाय के सातों पीठों के पीठाधिपति, रामानुज संप्रदाय, मध्व संप्रदाय, रामानंदाचार्य, आर्य समाज, नाथ संप्रदाय, जैन, बौद्ध व सिख समाज के प्रतिनिधि, सिखों के निहंग व हजारों की संख्या में मौजूद नागा साधुओं को पंडित लक्ष्मीनारायण जी चंदन तिलक लगाकर विदा कर रहे थे। 

लालकिला मैदान से आरंभ होकर नई सड़क व चावड़ी बाजार से होते हुए पटेल चौक के पास से संसद भवन पहुंचने के लिए इस विशाल जुलूस ने पैदल चलना आरंभ किया। रास्ते में अपने घरों से लोग फूलों की वर्षा कर रहे थे। हर गली फूलों का बिछौना बन गया था। यह हिंदू समाज के लिए सबसे बड़ा ऐतिहासिक दिन था। इतने विवाद और अहंकार की लड़ाई होते हुए भी सभी शंकराचार्य और पीठाधिपतियों ने अपने छत्र, सिंहासन आदि का त्याग किया और पैदल चलते हुए संसद भवन के पास मंच पर समान कतार में बैठे। 

उस दिन के बाद से आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ? नई दिल्ली का पूरा इलाका लोगों की भीड़ से भरा पड़ा था। संसद गेट से लेकर चांदनी चौक तक सिर्फ लोगों का हुजूम ही दिखाई दे रहा था। चश्मदीदों के अनुसार उस दिन कम से कम 10 लाख लोगों की भीड़ जुटी हुई थी, जिसमें से 10 से 20 हजार के करीब तो केवल महिलाएं ही शामिल थीं।

हिन्दू समाज के इतिहास  में दर्ज सबसे काला अध्याय 7 नवम्बर 1966:

7 नवम्बर 1966, उस दिन कार्तिक मास के शुक्‍ल पक्ष की अष्‍टमी तिथि थी, जिसे हम और आप गोपाष्‍ठमी नाम से जानते हैं, को जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल तक के लोग गो हत्या बंद कराने के लिए कानून बनाने की मांग। लेकर संसद के समक्ष जुटे थे। उस वक्त श्रीमती इंदिरा गाँधी जी प्रधानमंत्री थी और गृहमंत्री श्री गुलजारी लाल नंदा जी थे।

इस सिंहनाद और लोगों के भीड़ को देख कर श्रीमती इंदिरा गाँधी जी ने सत्ता के मद में चूर होकर  साधु-संतों, गायों और जुलूस में शामिल आम जनता पर अंधाधुंध गोलियों की बारिश करवा दी, जिसमे गाय, साधु-संत और आम लोग हजारों की संख्या में मारे गए थे। गोरक्षा महाभियान समिति के तत्कालीन मंत्रियों में से एक और पूरी घटना के गवाह, प्रसिद्ध इतिहासकार एवं लेखक आचार्य सोहनलाल रामरंग जी के अनुसार इस गोलीबारी में कम से कम 10 हजार लोग मारे गए थे। 

ट्रक बुलाकर मृत, घायल, जिंदा-सभी को उसमें ठूंसा जाने लगा। जिन घायलों के बचने की संभावना थी, उनकी भी ट्रक में लाशों के नीचे दबकर मौत हो गई। आखिरी समय तक पता ही नहीं चला कि सरकार ने उन लाशों को कहां ले जाकर फूंक डाला या जमीन में दबा डाला। पूरे शहर में कर्फ्यू लागू कर दिया।

करपात्री जी महाराज का इंदिरा गाँधी को दिया गया श्राप:

गोलियों से छलनी प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी जी का शरीर का अंतिम यात्रा।
गोलियों से छलनी प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी जी का शरीर का अंतिम यात्रा।


फायरिंग बंद होने के बाद करपात्री जी महाराज ने मारी हुई गायों के गले से लिपट कर रोते हुए कहा था कि "हम तो साधु हैं" किसी का बुरा नहीं करते लेकिन तूने माता समान निरपराध गायों को मारा है, जा इसका फल तुझे भुगतना पड़ेगा, मैं श्राप देता हूँ कि एक दिन तेरी देह भी इसी प्रकार गोलियों से छलनी होगी और तेरे कुल और दल का विनाश करने के लिए मैं हिमालय से एक ऐसा तपस्वी भेजूँगा जो तेरे दल और कुल का नाश करेगा। 

आम जनमानस इंदिरा जी के इस दुष्कृत्य पर दुःखी मन से यही दुआ कर रहा था कि भगवान करे कि ये भी इसी प्रकार मरे। अब इसे संयोग कहेंगे या करपात्री जी महाराज का श्राप कि इंदिरा जी का शरीर ठीक गोपाष्टमी के दिन उसी प्रकार गोलियों से छलनी हुआ था जैसे करपात्री जी महाराज ने श्राप दिया था। जैसे करपात्री जी का आशीर्वाद सदा सफल ही होता था वैसे ही उनका श्राप भी फलीभूत होता था।

अब आप खुद ही सोचिए? कि क्या ये संयोग था या फिर श्राप?

1- संजय गांधी मरे आकाश में तिथि थी "गोपाष्टमी"

2- इन्दिरा गाँधी मरी आवास में तिथि थी "गोपाष्टमी"

3- राजीव गाँधी मरे मद्रास में तिथि थी "गोपाष्टमी"


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