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भारत का समंदर में बड़ा धमाका, प्रोजेक्ट 18 के तहत अगली पीढ़ी का विध्वंसक विकसित कर रहा है, जो 500 किमी दूर से दुश्मनों पर नज़र रख सकता है, और ब्रह्मोस सहित 144 मिसाइलें भी ले जा सकता है।

Indian project 18: भारत अब समंदर में तहलका मचाने जा रहा है, प्रोजेक्ट-18 के तहत अगली पीढ़ी (Next-Gen) का विध्वंसक (Destroyer) विकसित कर रहा है। जो करीब 500 किलोमीटर दूर से ही दुश्मनों पर नज़र रख सकता है, और उसे पलक झपकते ही नेस्तनाबूद कर सकता है। यह विध्वंसक (Destroyer) अपने साथ ब्रह्मोस सहित लगभग 144 मिसाइलें भी ले जा सकता है। 

भारतीय नौसेना का P-18 डिस्ट्रॉयर।
भारतीय नौसेना का P-18 डिस्ट्रॉयर।



News Subah Ki: भारतीय नौसेना (Indian Navy) बड़े जोर-शोर से प्रोजेक्ट 18 (P-18) अगली पीढ़ी (Next-Gen) के विध्वंसक (Destroyer) पर काम कर रही है। यह आकार और क्षमता के मामले में मौजूदा विशाखापत्तनम श्रेणी के विध्वंसकों से कहीं आगे निकलने की उम्मीद है। यह लगभग 13,000 टन के अनुमानित विस्थापन के साथ, यह नया पोत भारतीय बेड़े का सबसे बड़ा पोत होगा और इसे अंतर्राष्ट्रीय संधियों के तहत क्रूजर के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है, जो 10,000 टन से अधिक वजन वाले युद्धपोतों पर लागू होते हैं।

दिसंबर 2023 में बोलते हुए, नौसेना उप प्रमुख, वाइस एडमिरल संजय जसजीत सिंह ने कहा, "भारतीय नौसेना ने अगली पीढ़ी के अधिक उन्नत और सक्षम विध्वंसक जहाजों के निर्माण पर काम शुरू कर दिया है, और इन जहाजों की योजनाएँ पहले से ही तैयार हैं।" विशाखापत्तनम श्रेणी के विध्वंसक, वर्तमान में भारतीय नौसेना (Navy) के सबसे बड़े डिस्ट्रॉयर हैं, जो लगभग 7,450 टन विस्थापन वाले हैं और इनमें 48 वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) लगे हैं। इसकी तुलना में निर्माणाधीन प्रोजेक्ट 18 (P-18) में 144 VLS सेल हैं, जो विभिन्न मिशन और विभिन्न भूमिकाओं के लिए कई मिसाइलों को सपोर्ट करेंगे।

 Highlights  

✅ प्रोजेक्ट-18 के तहत अगली पीढ़ी (Next-Gen) का विध्वंसक (Destroyer) विकसित कर रहा है। 

✅ यह भारतीय बेड़े का सबसे बड़ा पोत होगा, जो लगभग 13,000 टन के अनुमानित विस्थापन के साथ आयेगा।

✅ यह विध्वंसक (Destroyer) अपने साथ ब्रह्मोस सहित लगभग 144 मिसाइलें भी ले जा सकता है।

✅ इस युद्धपोत में चार बड़े सक्रिय इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार लगे होंगे।

✅ इन इलैक्ट्रोनिक प्रणालियों की कथित तौर पर लगभग 500 किलोमीटर से अधिक की रेंज है।
P-18 डिस्ट्रॉयर
भारतीय नौसेना का P-18 डिस्ट्रॉयर 



मल्टी रोल क्षमता के लिए उन्नत रडार और सेंसर सूट:

प्रोजेक्ट-18 के इस युद्धपोत में चार बड़े सक्रिय इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार लगे हैं, जो इसके सुपरस्ट्रक्चर में एकीकृत हैं। माना जाता है कि ये भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित लंबी दूरी के बहु-कार्यात्मक रडार हैं। इस रडार सूट में प्राथमिक रडार के रूप में एक S-बैंड सक्रिय ऐरे, एक वॉल्यूम सर्च रडार और एक मल्टी-सेंसर मास्ट शामिल है, जो हवाई और जमीनी खतरों की 360-डिग्री निगरानी और ट्रैकिंग प्रदान करता है। DRDO और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित इन प्रणालियों की कथित तौर पर 500 किलोमीटर से अधिक की रेंज है।

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समंदर का सिकन्दर भारतीय P-18 डिस्ट्रॉयर
भारतीय नौसेना का P-18 डिस्ट्रॉयर


P-18 डिस्ट्रॉयर का मिसाइल रक्षा प्रणाली और प्रहार भूमिका:

यह P-18 विध्वंसक (Destroyer) अपने 144 VLS कक्षों में मिसाइल प्रणालियों का एक संयोजन ले जाएगा:

                  पीछे की ओर 32 कक्ष निर्माणाधीन PGLRSAM के लिए समर्पित हैं, जो 250 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली एक लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जिसका उद्देश्य दुश्मन के विमानों और बैलिस्टिक मिसाइल खतरों को रोकना है।

                 48 कक्षों में ब्रह्मोस विस्तारित-दूरी वाली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और स्वदेशी प्रौद्योगिकी क्रूज मिसाइल रखी जाएगी, दोनों का उद्देश्य एंटी शिप और जमीनी-हमला मिशनों के लिए है।

                  64 सेल बहुत कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के लिए आवंटित किए गए हैं, जो हवाई और एंटी शिप मिसाइल खतरों के विरुद्ध अंतिम रक्षात्मक परत (Protective layer) के रूप में कार्य करेंगी।

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P-18 डिस्ट्रॉयर का अपेक्षित समय-सीमा और स्वदेशी विकास:

4 दिसंबर 2023 को नौसेना दिवस से पहले आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, वाइस एडमिरल सिंह ने कहा, "व्यापक समय-सीमा अब से लगभग पाँच वर्ष है। तब तक, हम अनुबंध को पूरा करने और पाँच से दस वर्षों के भीतर पूरी आपूर्ति करने की स्थिति में होंगे।" इस कार्यक्रम में नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार भी उपस्थित थे।

आत्मनिर्भर भारत पहल (Make in India) के तहत इस विध्वंसक (Destroyer) में 75% स्वदेशी सामग्री होने की उम्मीद है। यह दो बहुउद्देशीय (Malti Roll) हेलीकॉप्टरों का संचालन करने में सक्षम होगा। और यह पानी के भीतर स्वचालित ड्रोन (Automated Drones) लॉन्च करने और पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-submarine warfare) अभियानों को अंजाम देने में सक्षम होगा।

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भारतीय नौसेना की दीर्घकालिक विस्तार योजनाएँ:

भारतीय नौसेना (Navy) अपने दीर्घकालिक बल विकास (Long term force development) रणनीति के तहत वर्ष 2035 तक लगभग 170 से 175 युद्धपोतों के बेड़े का लक्ष्य बना रही है। जिसमें प्रोजेक्ट-18 विध्वंसक (Destroyer) के शामिल होने से इस दीर्घकालिक विस्तार योजना (Long term expansion plan) में बड़ा योगदान मिलने की उम्मीद है, जिससे भारत के रक्षात्मक (Defensive) और आक्रामक (Offensive) दोनों तरह के समुद्री अभियानों में नौसेना की क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।

Conclusion: 

भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिज़ाइन ब्यूरो (WDB) ने अगली पीढ़ी (Next-Gen) के विध्वंसक (Destroyer) P-18 की अवधारणा पेश (Concept introduced) की है, जो विशाखापत्तनम श्रेणी के विध्वंसकों की तुलना में काफ़ी बड़ा और अधिक सक्षम है। 13,000 टन विस्थापन वाले इस पोत में विविध मिसाइलों के लिए 144 ऊर्ध्वाधर प्रक्षेपण प्रणालियाँ (Vertical Launch Systems), बहु-क्षेत्रीय अभियानों के लिए उन्नत रडार प्रणालियाँ और स्वदेशी सामग्री पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिससे भारत की नौसैनिक शक्ति में वृद्धि हुई है। 


Disclaimer: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। News Subah Ki ने पोस्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही उनकी सटीकता की गारंटी देता है। व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं और आवश्यक रूप से News Subah Ki के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। पाठक विवेक का प्रयोग करें।

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