दशकों से सेना द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा इंसास राइफल की जगह लेगा, भारत में निर्मित बहुत ही खतरनाक AK-203!
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भारतीय हाइपरसोनिक ब्रह्मोस-2 मिसाइल |
News Subah Ki: इस साल ब्रह्मोस मिसाइल के अगले वर्जन यानी ब्रह्मोस-2 हाइपरसोनिक मिसाइल को तेजी से तैयार किए जाने की उम्मीद है, जिससे Chinna और Pakistan में दुश्मन के ठिकाने पलक झपकते ही ध्वस्त हो जाएंगे। और इसकी गति ध्वनि की स्पीड से 7-8 गुना ज्यादा यानी करीब 9,000 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। इसकी रेंज में दिल्ली से इस्लामाबाद और 1500 किमी की रेंज में Chinna का कोई भी शहर आ सकता है। इस मिसाइल से सिर्फ 5 से 8 मिनट में टारगेट को तबाह किया जा सकता है। नए साल पर यह मिसाइल ट्रेंड हो रही है। ब्रह्मोस 2 के आने से भारत की रक्षा क्षमता और अधिक मजबूत होगी, जिससे रणनीतिक बढ़त भी मिलेगी। आइए जानते हैं हाइपरसोनिक मिसाइलों की पूरी विवरण।
Highlights
• ब्रह्मोस-2 मिसाइल दुनिया की सबसे तेज मिसाइल होगी।
• पहली ब्रह्मोस मिसाइल ऐसे तैयार हुई थी।
• ब्रह्मोस लॉन्च करो भूल जाओ के सिद्धांत पर काम करती है।
• जानिए हाइपरसोनिक मिसाइलें की खूबियां।
• India में कौन सी हाइपरसोनिक मिसाइलें बन रही हैं।
• HGV-202F ग्लाइड वाहन जबरदस्त आइडिया
• हाइपरसोनिक मिसाइलें भी परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है
• आम मिसाइलों से ज्यादा खर्चीला है, हाइपरसोनिक मिसाइल
India-Russia के साझा सहयोग से पहली ब्रह्मोस मिसाइल बनाई गई थी, जिसकी मारक क्षमता 290 किलोमीटर तक है। यह मैक 2.8 (ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना ज्यादा) की गति के साथ विश्व की सबसे तेज क्रूज मिसाइल है। इसका नाम India की ब्रह्मपुत्र नदी और Russia की मस्कोवा नदी के नाम पर रखा गया है। यह दो चरणों वाली (पहले चरण में ठोस प्रणोदक इंजन और दूसरे में तरल Ram jet प्रणोदक) मिसाइल है।
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ब्रह्मोस-2 मिसाइल दुनिया की सबसे तेज मिसाइल होगी:
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भारतीय हाइपरसोनिक ब्रह्मोस-2 मिसाइल |
ब्रह्मोस-2 को बनाने में दुनिया की सबसे तेज़ गति से चलने वाली मिसाइल Russian जिरकॉन की तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस साल ब्रह्मोस मिसाइल के अगले वर्जन यानी ब्रह्मोस-2 हाइपरसोनिक मिसाइल को तेजी से तैयार किए जाने की उम्मीद है। यह Scramjet Engine तकनीक पर आधारित होगी। इस मिसाइल का स्पीड ध्वनि की स्पीड से 7-8 गुना ज्यादा यानी करीब 9,000 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। और इसकी रेंज 1,500 किलोमीटर तक होगी। ब्रह्मोस-2 को जहाज, पनडुब्बी, विमान और जमीन आधारित मोबाइल लॉन्चर से लॉन्च किया जा सकता है। यह उच्च गति और सटीकता के साथ दुश्मन के रडार और रक्षा तंत्र को भेदने में सक्षम होगी।
ब्रह्मोस लॉन्च करो भूल जाओ के सिद्धांत पर काम करती है:
ब्रह्मोस एक मल्टीप्लेटफॉर्म मिसाइल है, जिसे धरती, हवा और समुद्र में बहुआयामी मिसाइल से सटीकता के साथ लॉन्च किया जा सकता है। यह खराब मौसम के बावजूद दिन और रात में मार कर सकती है। यह मिसाइल दागो और भूल जाओ (Fire and Forget) के सिद्धांत पर काम करती है, यानी लॉन्च के बाद इसे मार्गदर्शन की जरूरत नहीं पड़ती है। अब ब्रह्मोस-2 मिसाइल हाइपरसोनिक मिसाइल है, जो स्पीड में बेजोड़ है। इसके 2027-28 तक तैनाती की उम्मीद है।
जानिए हाइपरसोनिक मिसाइलें की खूबियां:
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भारतीय हाइपरसोनिक ब्रह्मोस-2 मिसाइल |
हाइपरसोनिक मिसाइलों को 'सुपरफास्ट' मिसाइल भी कहा जाता है, जिनकी गति मैक 5 से 25 मैक के बीच होती है। यानी ये 8 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से मार कर सकती हैं। इसकी तुलना में सशस्त्र बलों के साथ पहले से ही सेवा में मौजूद India-Russia ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की गति मैक 3 है, और DRDO की विकसित निर्भय लैंड अटैक क्रूज मिसाइल मैक 0.9 पर उड़ती है। इसके विपरीत, पारंपरिक हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की गति मैक 3-4 होती है।
हाइपरसोनिक और क्रूज मिसाइलों में क्या है फर्क?
बैलिस्टिक मिसाइलें भी हाइपरसोनिक गति से उड़ती हैं। वे क्रूज मिसाइलों से मौलिक रूप से अलग होती हैं। बैलिस्टिक मिसाइलों को रॉकेट इंजन से चलाया जाता है जो उन्हें बाहरी अंतरिक्ष में ऊपर ले जाता है। जहां से उनके वारहेड एक वक्राकार उड़ान पथ पर चलते हुए पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश करते हैं। दूसरी ओर, क्रूज मिसाइलें 90 डिग्री Scramjet Engine पर लॉन्च की जाती हैं। हालांकि ये वायुमंडल के भीतर बहुत कम ऊंचाई पर उड़ती हैं। मानव रहित विमान की तरह पृथ्वी की वक्रता का अनुसरण करती हैं। बैलिस्टिक मिसाइलों के विपरीत, क्रूज मिसाइलें पैंतरेबाजी कर सकती है, और कुछ क्षेत्रों से बचने के लिए उनका मार्ग निर्धारित किया जा सकता है।
India में कौन सी हाइपरसोनिक मिसाइलें बन रही हैं:
India में अभी 3 हाइपरसोनिक तकनीक वाली परियोजनाएं चल रही हैं। पहली ब्रह्मोस-2 हाइपरसोनिक मिसाइल है जिसे DRDO और Russia की NPOM मशीनोस्ट्रोयेनिया की ओर से संयुक्त रूप से विकसित किया जा रहा है। इसकी रेंज 1,500 किलोमीटर और गति मैक 8 होने की उम्मीद है। यानी ये करीब 9 से 10 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से मार कर सकती है। इसके अलावा, हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोस्ट्रेटर व्हीकल और हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन भी विकसित किया जा रहा है।
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हाइपरसोनिक मिसाइलों को ले जाने वाला वाहन:
DRDO हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोस्ट्रेटर व्हीकल (HSTVD) विकसित करने में भी लगा हुआ है, जो हाइपरसोनिक उड़ान के लिए एक मानव रहित Scramjet संचालित विमान है। यह हाइपरसोनिक और लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों को ले जाने वाला एक वाहन होगा। इसका नागरिक कामों में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। जैसे कि कम लागत पर छोटे उपग्रहों का प्रक्षेपण किया जा सकेगा।
HGV-202F ग्लाइड वाहन जबरदस्त आइडिया
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भारतीय HGV-202F |
तीसरी परियोजना एक निजी कंपनी की ओर से शुरू की जा रही है। HGV-202F नामक इस हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन की कल्पना 5,500 किलोमीटर की प्रभावी रेंज और 300 किलोग्राम पेलोड के साथ मैक 20-21 तक यानि 19 हजार या 20 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की गति के साथ की गई है।
दो तरह की हाइपरसोनिक मिसाइल
हाइपरसोनिक मिसाइलें दो तरह की होती हैं-हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें। HGV को बैलिस्टिक मिसाइल या विमान के जरिए ज्यादा ऊंचाई पर ले जाया जाता है और फिर वॉरहेड की तरह छोड़ा जाता है। यह अपने लक्ष्य की ओर ग्लाइड करता है। क्रूज मिसाइलें अपनी पूरी उड़ान के दौरान हाइपरसोनिक गति बनाए रखने के लिए खुद के स्क्रैमजेट (Scramjet) इंजन का उपयोग करती हैं। दोनों अपने उड़ान के रास्ते टर्मिनल गंतव्य को चार्ट करने के लिए ऑनबोर्ड मार्गदर्शन प्रणाली का उपयोग करते हैं।
हाइपरसोनिक तकनीक इस्तेमाल करने वाले देश
दुनिया भर में अभी एक दर्जन से अधिक देश हाइपरसोनिक तकनीक पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं, जिसमें हाइपरसोनिक यात्री विमान भी शामिल हैं। अब तक, America और Russia के पास कई प्रकार के ऑपरेशनल हाइपरसोनिक हथियार हैं, जबकि Chinna ने कई मॉडल पेश किए हैं और कई उड़ान परीक्षण किए हैं। बताया जाता है कि Russia ने Ukraine के साथ चल रहे युद्ध में हाइपरसोनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है।
हाइपरसोनिक मिसाइलें भी परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है:
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भारतीय हाइपरसोनिक ब्रह्मोस-2 मिसाइल |
हाइपरसोनिक हथियारों को सेना के लिए अहम माना जाता है क्योंकि वे बेहद तेज, युद्ध में माहिर और लंबी दूरी तक मार करने वाले होते हैं। ये अपने साथ कई तरह के परमाणु या पारंपरिक हथियार ले जा सकते हैं। हाइपरसोनिक और बैलिस्टिक मिसाइलें दोनों ही विरोधियों के एंटी-एक्सेस और एरिया-डिनायल क्षेत्रों के बाहर तैनात किए जा सकते हैं। इनकी सटीकता, लंबी दूरी तय करने और ज्यादा स्पीड वाली मिसाइलों के इस्तेमाल ही शानदार बनाती हैं। ये लड़ाई की शुरुआत में ही दुश्मन के सुरक्षा कवच को भेद सकती है।
हाइपरसोनिक मिसाइल रडार के पहुंच से बाहर:
हाइपरसोनिक मिसाइलें वायुमंडल के अंदर उस ऊंचाई से नीचे उड़ती हैं, जहां बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम आमतौर पर काम करते हैं। वहां हाइपरसोनिक शानदार स्पीड और मोमेंटम के चलते ऐसी मिसाइलों का पता लगाना और उन्हें रोकना बेहद मुश्किल बना देता है।
Germany से जुड़ा है हाइपरसोनिक तकनीक:
हाइपरसोनिक तकनीक एडवांस्ड है। 1930 के दशक के अंत में Germany ने सिलबरवोगेल (सिल्वर बर्ड) का आविष्कार किया था, जो एक लिक्विड-प्रोपेलेंट रॉकेट-पावर्ड सब-ऑर्बिटल बॉम्बर के लिए एक डिजाइन था। यह मैक 17-18 तक की गति तक पहुंच सकता था। हालांकि, यह महज एक आइडिया बनकर रह गया।
आम मिसाइलों से ज्यादा खर्चीला है, हाइपरसोनिक मिसाइल:
कुछ पश्चिमी विश्लेषकों का सुझाव है कि हाइपरसोनिक मिसाइलों को खरीदने और तैनात करने में समान रेंज की बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में लगभग एक तिहाई अधिक लागत आ सकती है, जो युद्धक सामग्री या हथियारों से भी लैस होते हैं। ब्रह्मोस 2 एक हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है, जिसे India और Russia के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा विकसित किया जा रहा है। यह मिसाइल ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल का उन्नत संस्करण है।
Disclaimer: ये लेख इंटरनेट पर आधारित है, इसलिए इस लेख में दी गई जानकारी 100% सही नहीं हो सकती है। इसलिए इस लेख को लेकर कोई प्रकार का दावा या क्लेम करना अनुचित एवम् अमान्य होगा।
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